Tuesday, October 26, 2010

आवाज

तख्त बदल दो ताज बदल दो

कल ना बद्ला आज बदल दो

तोरो तोरो तिलस्म आज

बैइमानो का राज बदल दो

Monday, October 25, 2010

विद्रोह

मोकामा मैं चुनाव नजदीक है बिगुल बज चूका है पता नहीं मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूँ मोकामा विधानसभा के चुनावी समर में इस बार चार बाहुबली ताल ठोंक रहे हैं। सत्ताधारी जद (यू) की ओर से मौजूदा विधायक अनंत सिंह, राजद-लोजपा गठबंधन की ओर से ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी, संजय सिंह और मिट्ठू यादव बतौर निर्दलीय उम्मीदवार किस्मत आज़माएंगे। विगत दो विधानसभा चुनावों में अनंत सिंह और ललन सिंह के बीच सीधा मुक़ाबला होता रहा है. दोनों चुनावों में बाज़ी ललन सिंह के विपक्षी अनंत सिंह के हाथ लगती रही है, लेकिन इस बार इन दोनों को अपनी राह के दो रहबरों से चुनौती मिलने जा रही है. चारों बाहुबली जहां अपनी मुश्कें कस रहे हैं, वही आम लोग असमंजस में हैं कि आखिर किस बाहुबली के गले में विजय माला डाली जाए. चुनाव लड़नेवाले प्रत्याशियों का कम-से-कम मैटिक पास होना जरूरी हो, कभी इसकी वकालत भाजपा सांसद मशहूर वकील राम जेठमलानी ने की थी. अगर उनकी बात मान ली गयी होती, तो मोकामा से अनंत कुमार नामांकन दाखिल नहीं कर पाते. जी हां, जदयू के उम्मीदवार अनंत सिंह के पास कोई डिग्री नहीं है. वे सिर्फ साक्षर हैं,लोजपा की सोनम देवी नौवी पास है .इन उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान जो शपथ पत्र दिये हैं, उसमें उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता का विवरण भी दिया है। इनके गुणों की चर्चा नहीं करूँगा ये इतने बड़े है की किताब लिखी जा सकती है , जो निर्दलीय उम्मीदवार है उनकी बात नहीं पर जिनको पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है मेरा प्रश्न उनसे है क्या आप यही भविष्य देंगे बिहार को साक्षर और नौवी पास आपको पुरे मोकामा मैं एक भी ऐसा पड़ा लिखा नहीं मिला जिसे आप जनता के बीच भेज सके .लानत है आप सब पर जो मोकामा के लोगो को ऐसा उम्मीदवार दे कर मोकामा को और पीछे ले जाने का साजिश कर रहे है अभी आप जो कर ले पर मोकामा की जनता ही आपको सबक भी देगी
अनुरोध :-
राजनीति अच्छे लोगों के लिए नहीं है और यह आम चलन है पर ओशो रजनीश ने कहा कि जब तक अच्छे लोग राजनीति के सम्बंध में ऐसी विचारधारा रखेंगें बुरे लोग राजनीति में आतें रहेंगें। जागो मेरे गाउँ जागो जागो मेरे मोकामा वालों जागो इससे पहले की देर भी देर हो हो जाये अपनी पहचान बुलंद करो जरा यद् करो प्रफूला चाकी , यद् करो राम नन्दन बाबु , देखो अपने बुजुर्गों को , अपने बच्चों को क्या तुम इन्हें यही भविष्य दोगे क्या यही अनपढ़ लोग हमारे बच्चों का विकास करेंगे
जारो सोचो और वही करो जो दिल कहे . अपनी लड़ाई हमें खुद लड़नी होगी कमर कास लें
बाकि उम्मीद है .....



Thursday, October 22, 2009

ये किसका बिहार है


"समय शेष है नही पाप का भागी केवल व्याध ।
जो तटस्थ है समय लिखेगा उनका भी अपराध । । "
:- राम धारी सिंह दिनकर :-


Wednesday, August 19, 2009

उम्मीद

"मिला दे खाक में हस्ती
अगर कुछ मर्तबा चाहे ।
की दाना खाक में मिलकर
गुले गुलजार होता है ॥"
किसी ने सच ही कहा है कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है । अगर आपके अन्दर कुछ करने की चाह है तो कोई आपकी मंजिल को आपसे अलग नही कर सकता है । जिसने जब कोई कम दिल से ठान तो वो कर सकता है चाहे परिस्थिथि कितनी ही विपरीत क्यों न हो । अपने लक्ष्य को सामने रखकर जो लगन से उस काम में लग जाता है उसे मंजिल मिल ही जाती है।
एक शेर अर्ज है :---
"भटको न अपने पथ से
तो सब कुछ पा सकते हो प्यारे
तुम भी ऊँचे उठ सकते हो
छु सकते हो नभ के तारे "
बड़े बड़े लोगों की जीवनी उठा कर देख लें सब ने अपने आरम्भिक जीवन में काफी दुःख झेले है पर उनलोगों ने डटकर उसका मुकाबला किया ओर उससे जीता तो ही आज उनका नाम है नही तो वो भी आज एक आम इन्सान की तरह ही होते ।

Tuesday, August 11, 2009

बाटा नगर (मोकामा)


भारत का दूसरा सबसे बड़ा बाटा नगर मोकामा में ही है । कलकत्ता में सबसे बड़ा बाटा नगर नगर है । मोकामा का बाटा नगर लगभग की मी में फैला हुआ है । यही से पुरे बिहार , ऊ प , झारखण्ड , दिल्ली तक जूते चप्लों की सप्लाई होती है। लगभग २००० लोग यंहा कम करते है ।

भारत वैगन एण्ड इंजिनियरिंग कम्पनी ( मोकामा )



भारत वैगन एण्ड इंजिनियरिंग कम्पनी (बी.डब्लू.ई.एल) आई.एस.ओ.-9001:2000 प्रमाणित एक केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। यह भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत, भारी उद्योग विभाग में 13.08.2008 तक था। 13.08.2008 के अपरान्ह से इस कम्पनी का प्रशासनिक नियंत्रण रेल मंत्रालय को स्थानान्तरित कर दिया गया है।दिसम्बर 1978 में दो निजी क्षेत्र की रूग्न वैगन विनिर्माता कम्पनियों मेसर्स आर्थर बटलर कम्पनी लिमिटेड, मुजफ्फरपुर एवं मेसर्स ब्रिटेनियॉ इंजिनियरिंग कम्पनी लिमिटेड (वैगन प्रभाग) मोकामा का अधिग्रहण कर भारत वैगन को निगमित किया गया है। एल.पी.जी. सिलिण्डर के निर्माण के लिए इंडस्ट्रियल स्टेट बेला, मुजफ्फरपुर को वर्ष 1983-84 में कम्पनी की तीसरी विनिर्माण इकाई के रूप में शामिल किया गया है। वर्ष 1986 में भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन भारत भारी उद्योग निगम की समानुषंगी इकाई के रूप में कम्पनी को शामिल किया गया।मुजफ्फरपुर एवं मोकामा की दोनों इकाईयाँ पारंपरिक रूप से वैगन विनिर्माण कार्य से जुड़ा कारखाना है। अभिविन्यास, संयंत्र एवं यंत्र-समूह तथा स्थान, इस उत्पाद के लिए आदर्श रूप से उपयुक्त है। स्टील संरचना में आधे शतक से अधिक के प्रचुर अनुभव के साथ, भारत वैगन में बड़े स्टील संरचना कार्य के लिए जरूरी प्रायः सभी आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं। 316 मि.टन क्षमता के ब्रेक प्रेस की उपलब्धता इस दिशा में एक दुर्लभ परिसम्पति है। सभी तीनों इकाईयाँ विद्युत आपूर्ति के मामले में डी.जी. सेटों की उपलब्धता के कारण आत्मनिर्भर हैं। कारखानों के प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पास होने के कारण प्रचालन में सुविधा संभव हो सकी है।

राजेंद्र पुल मोकामा


मोकामा का राजेंन्द्र पुल एकमात्र ऐसा पुल है जो पुरे उत्तर बिहार को जोड़ता है । मोकामा का राजेंद्र पुल भारत का सबसे मजबूत लोहे का पुल है , इस पुल का नीचे का भाग रेलगाडी के लिए ओर ऊपर का मोटर गाड़ी के लिए है।

लगभग ३ किलोमीटर लंबा पुल है । ये पुल मोकामा के हथिदह को ओर बेगुसराय के सिमरारिया की जोरता है।

गंगा की पवन धाराओं को इस पुल से देखना सचमुच लाजबाब होता है । इस पुल की मजबूती ओर सुन्दरता का क्या कहना , लोग कहते इस पुल को बनाने में ३ -४ साल का वक्त लगा था । लगभग १०,००० हजार लोग इसमे कम करते थे ।

Saturday, August 8, 2009

एक चंद्रशेखर और भी थे




वो लड़ते रहे अंग्रेजों से और जब आखिरी गोली बची तो उसे चूमकर अपने आप को मार लिया । जी हाँ ये कहानी चंद्रशेखर आजाद की लगती है , पर एक और आज़ादी का दीवाना था जिनसे आखिरी गोली से अपने आप को उडा लिया ।
१० दिसम्बर १८८८ को बिहारी ग्राम जिला बोगरा (अब बांग्लादेश ) में जन्मे प्रफुल्ला चंद्र चाकी को बचपन से ही अपनी मात्रभूमि से लगाव था । जब वो मात्र २० वर्ष के थे तब ही उन्होंने अंग्रेजो से लोहा लेना शुरू कर दिया था ।
अपने छात्र जीवन से ही चाकी ने चाकी ने अंग्रेजों से बगावत शुरू कर दिया , अपने युवा साथी खुदीराम बोस के साथ मिलकर उन्होंने किंग्स्फोर्ड (जो की कलकत्ता के मजिस्ट्रेट थे) को मारने का विचार किया । अप्रैल ३० १९०८ जब किंग्स्फोर्ड एक बग्ग्घी में जा रहा था तो खुदीराम बोस और प्रफुल्ला चाकी ने उसपर बम से हमला कर दिया , पर दुर्भाग्य से किंग्स्फोर्ड उस बग्ग्घी में सवार नही था और वो वच गया । जब प्रफुल्ला और खुदीराम को ये बात पता चली की किंग्स्फोर्ड बच गया और उसकी जगह गलती से दो महिलाएं मारी गई तो वो दोनों थोरे से निराश हुए वो दोनों ने अलग अलग भागने का विचार किया और भाग गए । खुदीराम बोस तो मुज्जफर पुर में पकरे गए पर प्रफुल्ला चाकी जब रेलगारी से भाग रहे थे तो समस्तीपुर में एक पुलिस वाले को उनपर शक हो गया वो उसने इसकी सूचनाआगे दे दी , शिनाक्त शिनाक्त हुई जब इसका अहसाह हुआ तो वो मोकामा रेलवे स्टेशन पर उतर गए पर पुलिस ने पुरे मोकामा स्टेशन को घेर लिया था दोनों और से गोलियां चली पर जब आखिरी गोली बची तो प्रपुल्ला चाकी ने उसे चूमकर ख़ुद को मार लिया और सहीद हो गए , पुलिस ने उनके शव को अपने कब्जे लेकर उनका सर काटकर कोलकत्ता भेज दिया ,वहां पर प्रफुल्ला चाकी के रूप में उनकी शिनाख्त हुई ।
११ अगस्त को खुदीराम बोस को फांसी दी गई ओर ये दिन बलिदान दिवस के रूप में याद किया जाता है ।
दोनों शहीदों को मेरा सत सत नमन :---

शील भद्र याजी


वह वोलता तो बड़े बड़े की बोलती बंद हो जाती थी । आजादी के दीवानों में कुछ एक ही ऐसे लोग थे जिनको गाँधी जी ओर सुभाष चंद्र बोस दोनों का सानिध्य प्राप्त था । जब उनका दिल करता तो गाँधी जी से गाँधी वाद सीख लेते जब दिल में आता तो सुभाष के साथ मिलकर अंग्रेजो से लोहा लेने लगते । चाहे आहिंसा के पुजारी ,चाहे गरम दल के लोग दोनों ही दल के लोग याजी को अपना नेता मानते थे । याजी भी फक्कर मसीहा थे जब दिल में आया गरम दल में ,जब दिल में आया नरम दल में । मगर हर हाल में अंग्रेजो को बाहर भगाने के लिए तत्पर । अपनी पूरी जिन्दगी उन्होंने समाज सेवा में लगा दिया , जब तक वो जीवित रहे लड़ते रहे समाज सुधारमें लगे रहे , जीवन के आखरी दिनों में भी वो लड़ते रहे :- चाहे बात किसानो की हो , चाहे बात मजदूरों की हो , चाहे गरीबों के हक़ की बात हो , उन्होंने अपना पूरा जीवन देश पर न्योछावर कर दिया
देश के इस सच्चे सपूत को एक भीनी श्रधान्जली :-------------
महान नायक को सलाम :----- जय हिंद
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