Saturday, March 12, 2011

अभिशाप या वरदान

अभिशाप या वरदान:- लाख मुसीबत आये पर जो डटकर खड़ा रहे मंजिल उसे जरुर मिलेगी . बल्कि मैं तो कहूँगा की उसे उसके सोच से भी बड़ी मंजिल मिल जाएगी. 
नेपोलियन को उसके छोटे कद के कारन सेना मैं नौकरी न मिला पर क्या वो हार मान कर बैठ गया ... नहीं उसने वो कर दिखाया की अभिशाप भी वरदान हो गया . वो फ्रांस का सम्राट बना . डॉ अब्दुल कलाम एयर फोर्स के एक interview  मैं चयान्नित नहीं हो पाए पर वो भारत जैसे बड़े देश के  राष्ठपति बने . किशोर दा का गला बचपन में बिलकुल ख़राब था  वो गा नहीं सकते थे या बहुत बुरा गाते थे . पर बचपन में ही किसी चोट के बजह से उनकी ऊँगली में बहुत बड़ा जखम हो गया था जिसके बजह से वो १ महीने तक लगातार रोते रहे थे  और जब उनका जखम ठीक हुआ  तो उनके लगातार रोते रहने के कारन उनका गला भी सुरीला हो गया . तो हम आप भी देखे की जो समस्या हमारे सामने है वो हमें डरा रही है या आगे बढने को कहा रही है .अगर आप किसी काम में असफल हो जाएँ हो डरें नहीं बल्कि और लगन से मेहनत करें आपको मंजिल जरूर मिलेगी दुनिया को छोर दें उसका काम ही है लोगो पर हसना  . 
बिहारी बाबु को भला कौन नहीं जानता :- जी शत्रुहन सिन्हा  (खामोश). क्या आप जानते है की वो ४ भाई है . राम, लखन , भरत, शत्रुहन. उनके ३ भाई डॉक्टर थे और अपने बिहारी बाबु को ड़ोक्टोरी पढने में मन ही नाहिया लगता था  उनके परिवार वाले काफी दुखी थे उनसे लोग कहते की ३ भाई डॉक्टर और ये शत्रुहन   कुछ भी नहीं 
पर बिहारी बाबु रुके नहीं वो अपने ज़माने के मशहूर नायक बने . और जब अटल बिहारी बाजपेयी  के सरकार में मंत्री बने तो पता है कौन सा मंत्रालय मिला उनको  जी हाँ  वो स्वास्थ्य मंत्री बने .  
इसलिए मेरे भाई जब मुसीबत आये तो डरों नहीं बल्कि उनका सामना करो देखोगे की सारा आसमान साफ हो जायेगा और तुम सफल हो जोयेगे . समस्या तुम्हें डराने के लिए नहीं  बल्कि तुम्हे  जाचने को आती है. 



Tuesday, March 8, 2011

कफन

जोड़ लो जीवन मैं तुम चाहे
जितने हीरे-मोती
बस इतना याद रखना
कफन मैं जेब नहीं होती

Monday, March 7, 2011

उमंगें


बहुत डोर थी
बहुत थी पतंगें
मगर उड़ती कैसे
नहीं थी उमंगें

तूफान


किनारों से ऐ खुदा
मुझको दूर ही रख
ले चल मुझे वंहा
जंहा तूफान उठते है

पॉवं


ये तो सच है की
पॉवो ने बहुत कष्ट उठायें है
पर पॉवं इन्ही की वजह से
राहों पे तो आए हैं

आजमाना


फिसलना तय था मेरा
बर्फ के पहाड़ों से
पर अपने आप को
मैंने भी आजमाना था

दरिया


हम हैं दरिया
हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी निकल जायेंगे
वहीँ रास्ता बना लेंगें

चिराग


जहाँ रहेगा वहीँ रौशनी
लुटायेगा
किसी चिराग का कोई
घर नहीं होता

तितली


आँधियों तुमने दरख्तों
को गिराया होगा
फूल से लिपटी किसी
तितली को हिलाकर देखो

Tuesday, March 1, 2011

मोकामा न्यूज़


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